BENJAMIN FRANKLIN

Posted by Padhayi Adda

" A house is not a home unless it contains food and fire for the mind as well as the body. "

ARISTOTLE

Posted by Padhayi Adda

" All men by nature desire knowledge. "


ALBERT EINSTEIN

Posted by Padhayi Adda

" A table, a chair, a bowl of fruit and a violin; what else does a man need to be happy? "


CONFUCIUS

Posted by Padhayi Adda

"A superior man is modest in his speech, but exceeds in his actions. "

हमारा युग निर्माण सत्संकल्प ।।

Posted by Padhayi Adda

—हम ईश्वर को सर्वव्यापी, न्यायकारी मानकर उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतारेंगे।

—शरीर को भगवान् का मंदिर समझकर आत्म- संयम और नियमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करेंगे।

—मन को कुविचारों और दुर्भावनाओं से बचाए रखने के लिए स्वाध्याय एवं सत्संग की व्यवस्था रख रहेंगे।

—इंद्रिय संयम, अर्थ संयम, समय संयम और विचार संयम का सतत अभ्यास करेंगे।

— अपने आपको समाज का एक अभिन्न अंग मानेंगे और सबके हित में अपना हित समझेंगे।

—मर्यादाओं को पालेंगे, वर्जनाओं से बचेंगे, नागरिक कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाजनिष्ठ बने रहेंगे।

—समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को जीवन का एक अविच्छिन्न अंग मानेंगे।

—चारों ओर मधुरता, स्वच्छता, सादगी एवं सज्जनता का वातावरण उत्पन्न करेंगे।

— अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे।

—मनुष्य के मूल्यांकन की कसौटी उसकी सफलताओं, योग्यताओं एवं विभूतियों को नहीं, उसके सद्विचारों और सत्कर्मों को मानेंगे।

—दूसरों के साथ वह व्यवहार न करेंगे, जो हमें अपने लिए पसंद नहीं।

—नर- नारी परस्पर पवित्र दृष्टि रखेंगे।

—संसार में सत्प्रवृत्तियों के पुण्य प्रसार के लिए अपने समय, प्रभाव, ज्ञान, पुरुषार्थ एवं धन का एक अंश नियमित रूप से लगाते रहेंगे।

—परम्पराओं की तुलना में विवेक को महत्त्व देंगे।

—सज्जनों को संगठित करने, अनीति से लोहा लेने और नव- सृजन की गतिविधियों में पूरी रुचि लेंगे।

—राष्ट्रीय एकता एवं समता के प्रति निष्ठावान् रहेंगे। जाति, लिंग, भाषा, प्रांत, सम्प्रदाय आदि के कारण परस्पर कोई भेदभाव न बरतेंगे।

—मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है, इस विश्वास के आधार पर हमारी मान्यता है कि हम उत्कृष्ट बनेंगे और दूसरों को श्रेष्ठ बनाएँगे, तो युग अवश्य बदलेगा।

—‘‘हम बदलेंगे- युग बदलेगा’’, ‘‘हम सुधरेंगे- युग सुधरेगा’’ इस तथ्य पर हमारा परिपूर्ण विश्वास है।


मैं तो मोहब्बत का, वो नगमा छोड़ आया !

Posted by Padhayi Adda

मैं तो जमीं तो जमीं, आसमाँ छोड़ आया,
जाने कितने दिलों की, दास्तां छोड़ आया !


मैं यादों के झरोखों से देखता हूँ अब भी,
कि बदन साथ था, पर आत्मा छोड़ आया !


किस से कहूँ मैं अपना दर्दे दिल आखिर,
मैं तो मोहब्बत का, वो नगमा छोड़ आया !


किसमें सुख ढूंढ़ रहे हो आप ।।

Posted by Padhayi Adda

10 साल पहले पड़ोसियों के घर में मैच को उनकी टीवी पे देखने में बड़ा सुख था पर आज खुद के घर की टीवी में सुख नहीं मिलता ।

10 साल पहले सादा फोन में भी सुखी लगते थे पर आज एप्पल के आईफोन में भी खुशी नहीं मिलती ।

10 साल पहले सादा साईकिल में भी सुख था पर आज 10,000 की रेंजर साईकिल में भी सुखी नहीं लग रहे ।

10 साल पहले जो सुख लुप धुप वाली 50 रूपए की घड़ी में था आज स्मार्टवॉच में भी वो खुशी नहीं मिलती ।

10 साल पहले 1 जोड़ी नए कपड़े खरीदे जाने पे जो सुख महसूस होता था , आज 4 जोड़ी खरीदने पे भी कुछ महसूस नहीं होता ।

10 साल पहले 200 रूपए के जूते में जो खुशी मिलती थी वो आज 5000 वाले में नहीं मिलती

कुछ ही साल पहले जो मज़ा स्पलेंडर बाइक आता था वो आनन्द अब केटीएम/पल्सर/अपाचे बाइक में भी नहीं आता । 

10 साल पहले दिन में 4 घंटे बिजली और बिना फ्रिज/कूलर/AC के भी अच्छा सुख महसूस होता था पर आज 24 घंटे इनवर्टर और सभी सुविधाओं में भी सामान्य ही महसूस होता है

कुल मिलाकर 10 साल में अधिक से अधिक व अच्छी भैतिक सुख सुविधाओं के होने के बावजूद हम लोग पहले जितने सुखी महसूस नहीं होते ।

और आज भी जिन भौतिक वस्तुओं, गहने,प्लाट, बड़ा घर, बड़ी गाड़ी/ भोग विलास को सुख समझ कर उनके पीछे अंधे होकर दौड़ में लगे हैं, एक समय आएगा कि वो सब चीजें पाकर भी आप खुश नहीं हो पाओगे, उन सब चीजों को पाने के बाद भी खालीपन लगेगा और अपने आप को सुखी नहीं होता पाओगे व अशांत ही रहोगे ।